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Monday, April 9, 2012

शाम के लम्हे

हम उनमे से नहीं हैं..
जिन्हें शराब सोने को चाहिए..
करे असर जरा भी अगर वो जाम
तो बस हमें खोने को चाहिए….


दो पल साकी को याद किया..
तीन तुम्हे…
हम तो ऐसे ही हैं...
चाहें के,
ऐसे लम्हे बार बार आयें
और उन्ही लम्हों में
खुद को डबोने को चाहिए….. 

Wednesday, June 30, 2010

hans le ae duniya

हमारे घर को असमान की बुलंदियां

सह सकी

शगुफ्तगी की कमान

हाथों में मेरे

रह सकी |


सकता तो वो बरसता ही क्यूँ हम पर

छत हमारी ही क्यूँ

गिरती हमपर |


कल दुनिया बारी हमारी आएगी

चेहरे पे हंसी हमारी आएगी,

कर लोगे क्या कर के दिखादो

एक दिन बारी हमारी आएगी, हमारी आएगी, हमारी आएगी |